अध्याय 1 – फसल उत्पादन एवं प्रबंधन

अध्याय 1 – फसल उत्पादन एवं प्रबंधन

 

  1. परिचय (Introduction)
  • हमें जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है।
  • पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, लेकिन मनुष्य और जानवर पौधों और जानवरों से भोजन प्राप्त करते हैं।
  • जनसंख्या बढ़ने के कारण, हमें अधिक भोजन की आवश्यकता है। इसलिए, फसल उत्पादन और प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है।
  1. फसल (Crop)
  • जब एक ही प्रकार के पौधे बड़े पैमाने पर एक स्थान पर उगाए जाते हैं, तो उसे फसल कहते हैं।
    • उदाहरण: गेहूँ की फसल का अर्थ है कि खेत में उगाए गए सभी पौधे गेहूँ के हैं।
  • फसलों के प्रकार (Types of Crops): भारत में, ऋतुओं के आधार पर फसलों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:
    • खरीफ फसलें (Kharif Crops):
      • ये फसलें वर्षा ऋतु में बोई जाती हैं (जून से सितंबर तक)।
      • इन्हें अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
      • उदाहरण: धान (चावल), मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास।

            रबी फसलें (Rabi Crops):

  • ये फसलें सर्दी ऋतु में बोई जाती हैं (अक्टूबर से मार्च तक)।
  • इन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है।
  • उदाहरण: गेहूँ, चना, मटर, सरसों, अलसी।
  1. कृषि पद्धतियाँ (Agricultural Practices)

फसल उगाने के लिए किसान कई तरह के काम करते हैं, जिन्हें कृषि पद्धतियाँ कहते हैं। ये चरणबद्ध तरीके से किए जाते हैं:

  1. मिट्टी तैयार करना (Preparation of Soil):
    • यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
    • मिट्टी को पलटना और पोला करना (Ploughing and Loosening): इससे जड़ें गहराई तक जा पाती हैं और श्वसन आसानी से करती हैं। यह मिट्टी में हवा का संचार भी बढ़ाता है।
    • हल चलाना (Ploughing): पारंपरिक रूप से हल से किया जाता है। आजकल ट्रैक्टर से चलने वाले कल्टीवेटर का उपयोग होता है।
    • मिट्टी पलटने से केंचुआ और सूक्ष्मजीवों को बढ़ने में मदद मिलती है, जो मिट्टी को और उपजाऊ बनाते हैं।
  1. बुवाई (Sowing):
  •             बुवाई से पहले, अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन किया जाता है। स्वस्थ बीज ही अच्छी उपज देते हैं।
  •             पारंपरिक तरीका: कीप (फनल) का उपयोग करके हाथ से बीज बोना।
  •             सीड ड्रिल (Seed Drill): आजकल ट्रैक्टर से चलने वाले सीड ड्रिल का उपयोग किया जाता है। यह बीजों को सही

             दूरी और गहराई पर बोता है, जिससे समय और श्रम की बचत होती है।

iii. खाद एवं उर्वरक देना (Adding Manure and Fertilizers):

  •             फसलों को पोषक तत्व प्रदान करने के लिए मिट्टी में खाद और उर्वरक मिलाए जाते हैं।
  •             खाद (Manure): जैविक पदार्थ (गोबर, पौधों के अवशेष) के अपघटन से बनती है। यह मिट्टी को ह्यूमस प्रदान

           करती है और जल धारण क्षमता बढ़ाती है।

  •           उर्वरक (Fertilizers): रासायनिक पदार्थ होते हैं जो विशेष पोषक तत्वों (जैसे यूरिया, NPK) से भरपूर होते हैं। ये

          रासायनिक कारखानों में बनते हैं।

खाद और उर्वरक में अंतर:

 

  1. सिंचाई (Irrigation):
  • निश्चित अंतराल पर फसलों को पानी देना सिंचाई कहलाता है।
  • सिंचाई के स्रोत: कुएँ, नलकूप, तालाब, झीलें, नदियाँ, बाँध और नहरें।
  • सिंचाई के पारंपरिक तरीके: मोट (पुली), चेन पंप, ढेकली, रहट (लीवर सिस्टम)।
  • सिंचाई के आधुनिक तरीके:
    • छिड़काव तंत्र (Sprinkler System): असमान भूमि के लिए उपयोगी, जहाँ पानी कम उपलब्ध हो। पानी पाइपों से ऊपर जाकर फुहारों के रूप में गिरता है, जैसे बारिश हो रही हो।
    • ड्रिप तंत्र (Drip System): पौधों की जड़ों में बूंद-बूंद करके पानी गिरता है। फलदार पौधों, बगीचों और वृक्षों को पानी देने का सबसे अच्छा तरीका, जहाँ पानी बिल्कुल बर्बाद नहीं होता।
  1. खरपतवार से सुरक्षा (Protection from Weeds):
  • खेत में फसल के साथ उगे अवांछित पौधों को खरपतवार कहते हैं।
  • ये फसल के पोषक तत्वों, पानी और प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे फसल की वृद्धि रुक जाती है।
  • खरपतवार निकालना (Weeding): खरपतवारों को हटाने की प्रक्रिया।
    • गुड़ाई (Tilling): बुवाई से पहले खेत जोतने से खरपतवार जड़ से उखड़ जाते हैं।
    • हाथ से निकालना: खुरपी का उपयोग करके।
    • खरपतवारनाशी (Weedicides): रसायनों का छिड़काव (जैसे 2,4-D)। ये खरपतवारों को मारते हैं लेकिन फसल को नुकसान नहीं पहुँचाते।
  1. कटाई (Harvesting):
  • जब फसल पूरी तरह पक जाती है, तो उसे काटना कटाई कहलाता है।
  • कटाई के तरीके:
    • हाथ से: दरांती (sickle) का उपयोग करके।
    • मशीन से: हार्वेस्टर (Harvester) नामक मशीन का उपयोग किया जाता है।
  • थ्रेशिंग (Threshing): काटी गई फसल से अनाज को अलग करना। यह पारंपरिक रूप से बैलों से या मशीन (थ्रेशर) से किया जाता है।
  • कंबाइन (Combine): एक मशीन जो कटाई और थ्रेशिंग दोनों एक साथ करती है।

vii. भंडारण (Storage):

  • अनाज को नमी, कीटों, चूहों और सूक्ष्मजीवों से बचाने के लिए सही तरीके से भंडारित करना बहुत महत्वपूर्ण है।
  • छोटे पैमाने पर: अनाज को धातु के ड्रम या जूट के बोरों में रखा जाता है।
  • बड़े पैमाने पर: साइलो (Silos) और अन्न भंडार (Granaries) का उपयोग किया जाता है।
  • भंडारण से पहले अनाज को अच्छी तरह से सुखाया जाता है ताकि नमी कम हो जाए और कीटों और सूक्ष्मजीवों से बचा जा सके।
  • नीम की पत्तियां और रासायनिक उपचार भी भंडारण में मदद करते हैं।
  1. पशुपालन (Animal Husbandry)
  • जब जानवरों को घरों या फार्मों में पाला जाता है और उन्हें उचित भोजन, आश्रय और देखभाल प्रदान की जाती है, तो उसे पशुपालन कहते हैं।
  • यह भोजन के लिए जानवरों के पालन-पोषण से संबंधित है (दूध, अंडे, मांस)।
  • उदाहरण: गाय, भैंस, भेड़, बकरी, मुर्गी आदि।

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