अध्याय 1 – हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल
- मध्यकालीन इतिहास (Medieval History)
- यह अध्याय लगभग 700 ई. से 1750 ई. तक के हजार वर्षों के भारतीय इतिहास का अध्ययन करता है।
- इस अवधि को भारतीय इतिहास में मध्यकाल (Medieval Period) कहा जाता है।
- यह एक ऐसा समय था जब भारतीय उपमहाद्वीप में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन हुए।
- मानचित्र (Maps)
- इतिहास को समझने के लिए मानचित्र बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
- अल–इदरीसी का विश्व मानचित्र (Al-Idrisi’s World Map – 12वीं सदी):
- एक अरब भूगोलवेत्ता अल-इदरीसी ने 1154 में दुनिया का एक नक्शा बनाया।
- इस नक्शे में भारतीय उपमहाद्वीप को दिखाया गया था, लेकिन दक्षिण भारत उस जगह पर है जहाँ हम आज उत्तर भारत की उम्मीद करेंगे, और श्रीलंका शीर्ष पर है।
- स्थानों के नाम अरबी में दिए गए थे।
- फ्रांसीसी मानचित्रकार का मानचित्र (Map by French Cartographer – 1720s):
- एक फ्रांसीसी मानचित्रकार ने 1720 के दशक में भारतीय उपमहाद्वीप का एक और मानचित्र बनाया।
- यह मानचित्र आज के हमारे मानचित्र से अधिक मिलता–जुलता है।
- इस मानचित्र का उपयोग यूरोपीय नाविकों ने अपनी यात्राओं के दौरान किया था।
- महत्वपूर्ण बिंदु: मानचित्र समय के साथ कैसे बदलते हैं, यह हमें उस समय की जानकारी और ज्ञान के बारे में बताता है।
- नई और पुरानी शब्दावली (New and Old Terminologies)
- समय के साथ भाषा और शब्दों के अर्थ बदल जाते हैं।
- उदाहरण:
- ‘हिंदुस्तान‘ (Hindustan):
- 13वीं सदी में (मिन्हाज–ए–सिराज द्वारा): इस शब्द का अर्थ केवल पंजाब, हरियाणा और गंगा-यमुना के बीच का क्षेत्र था, जो दिल्ली सल्तनत के नियंत्रण में था।
- 16वीं सदी में (बाबर द्वारा): बाबर ने इस शब्द का उपयोग भारतीय उपमहाद्वीप के भूगोल, जीवों और यहाँ के निवासियों की संस्कृति का वर्णन करने के लिए किया।
- आज: यह शब्द पूरे भारत को दर्शाता है।
- ‘विदेशी‘ (Foreigner):
- मध्यकाल में: ‘विदेशी’ वह व्यक्ति होता था जो किसी गाँव में बाहरी हो, जो उस समाज या संस्कृति का हिस्सा न हो। शहर में रहने वाले के लिए एक वनवासी विदेशी हो सकता था।
- आज: ‘विदेशी’ वह व्यक्ति है जो दूसरे देश से आता है।
- ‘हिंदुस्तान‘ (Hindustan):
- यह समझना महत्वपूर्ण है कि इतिहासकार जब अतीत के ग्रंथों का अध्ययन करते हैं तो उन्हें इन भाषाई परिवर्तनों के प्रति सचेत रहना पड़ता है।
- इतिहासकार और उनके स्रोत (Historians and Their Sources)
इतिहासकार अतीत के बारे में जानने के लिए विभिन्न स्रोतों का उपयोग करते हैं:
- सिक्के (Coins): शासकों, साम्राज्यों और आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी।
- शिलालेख (Inscriptions): मंदिरों, स्तंभों पर उत्कीर्ण लेख जो राजाओं, दान और घटनाओं के बारे में बताते हैं।
- स्थापत्य कला (Architecture): इमारतें, मंदिर, मस्जिद आदि जो उस समय की कला, इंजीनियरिंग और जीवन शैली को दर्शाते हैं।
- ग्रंथ/अभिलेख (Texts/Records):
- कागज का उपयोग: मध्यकाल में कागज का उपयोग बहुत बढ़ गया। यह सस्ता हो गया और इसका उपयोग पवित्र ग्रंथों, शासकों के वृत्तांतों, संतों के पत्र, अदालतों के रिकॉर्ड आदि लिखने के लिए किया जाता था।
- पांडुलिपियाँ (Manuscripts): ये हाथ से लिखी गई पुस्तकें थीं। इन्हें अक्सर अमीर लोग, शासक, मठ और मंदिर एकत्र करते थे।
- आदिलेखक (Scribes): वे लोग जो पांडुलिपियों की नकल करते थे। कभी-कभी नकल करते समय वे मूल में छोटे बदलाव कर देते थे, जिससे समय के साथ पांडुलिपियों की विभिन्न प्रतियाँ मूल से काफी अलग हो जाती थीं।
- आर्काइव्स (Archives): वह स्थान जहाँ दस्तावेजों और पांडुलिपियों को संग्रहीत किया जाता है।
- नए सामाजिक और राजनीतिक समूह (New Social and Political Groups)
हजार वर्षों की इस अवधि में कई बड़े सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन हुए:
- प्रौद्योगिकीय नवाचार (Technological Innovations):
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- फ़ारसी चक्र (Persian Wheel): सिंचाई में उपयोग।
- चरखा (Spinning Wheel): कताई में उपयोग।
- आग्नेय अस्त्र (Firearms): युद्ध में बारूद और बंदूकों का उपयोग।
- नए खाद्य पदार्थ और पेय (New Food and Beverages):
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- आलू, मक्का, मिर्च, चाय और कॉफी जैसे नए खाद्य पदार्थ भारतीय उपमहाद्वीप में आए।
iii. गतिशीलता में वृद्धि (Increased Mobility):
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- अवसरों की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा करने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई।
- राजपूत (Rajputs): एक महत्वपूर्ण समुदाय जो इस अवधि में सामने आया। ये वे समूह थे जो योद्धाओं के रूप में खुद को क्षत्रिय मानते थे।
- मराठा, सिख, जाट, अहोम, कायस्थ: अन्य समूह जिन्होंने राजनीतिक महत्व प्राप्त किया।
- पर्यावरण में बदलाव (Changes in Environment):
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- जंगल काटे गए, कृषि का विस्तार हुआ, जिससे वनवासियों को मजबूरन विस्थापित होना पड़ा।
- समाज जातियों (jatis) और उप-जातियों (sub-jatis) में विभाजित हो गया, और उनके रैंक उनके व्यवसाय के आधार पर भिन्न होते थे।
- पंचायत (Panchayat): जातियों के अपने नियम और विनियम होते थे, जिनका पालन जाति के बड़े-बुजुर्गों की एक सभा (पंचायत) द्वारा किया जाता था।
- क्षेत्र और साम्राज्य (Regions and Empires)
- इस अवधि में विभिन्न क्षेत्रीय राज्यों (Regional States) और बड़े साम्राज्यों (Large Empires) का उदय हुआ।
- उदाहरण: चोल, खिलजी, तुगलक और मुगल जैसे राजवंशों ने बड़े साम्राज्य बनाए।
- इन साम्राज्यों में अक्सर विभिन्न क्षेत्र और लोग शामिल होते थे।
- जब एक साम्राज्य का पतन होता था, तो क्षेत्रीय राज्य फिर से उभरते थे।
- पुराने और नए धर्म (Old and New Religions)
- हिंदू धर्म में परिवर्तन (Changes in Hinduism):
- नए देवी-देवताओं की पूजा।
- मंदिरों का निर्माण।
- ब्राह्मणों (Brahmanas) और पुजारियों का महत्व बढ़ा।
- भक्ति आंदोलन (Bhakti Movement): व्यक्तिगत देवता के प्रति प्रेम और भक्ति पर जोर दिया गया, जो बिना पुजारियों की मदद के भी पूजा करने की अनुमति देता था।
- इस्लाम का आगमन (Arrival of Islam):
- 7वीं शताब्दी में व्यापारियों और बाद में शासकों के साथ इस्लाम भारत में आया।
- कुरान (Quran): मुसलमानों का पवित्र ग्रंथ।
- उलेमा (Ulama): मुस्लिम विद्वान और न्यायविद।
- इस्लाम दो प्रमुख संप्रदायों में विभाजित था: शिया (Shia) (जो पैगंबर मुहम्मद के दामाद अली को मुस्लिम समुदाय का वैध नेता मानते थे) और सुन्नी (Sunni) (जो खलीफाओं के अधिकार को स्वीकार करते थे)।
- इतिहास की अवधियाँ (Periods of History)
- इतिहासकार अक्सर इतिहास को अवधियों में विभाजित करते हैं ताकि अध्ययन आसान हो सके।
- ब्रिटिश इतिहासकार: भारतीय इतिहास को हिंदू, मुस्लिम और ब्रिटिश अवधियों में विभाजित किया।
- आधुनिक विभाजन: प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक।
- मध्यकाल: इस अवधि को बड़े पैमाने पर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तनों के लिए जाना जाता है, जो इसे “आधुनिक” काल से अलग करते हैं।
- “आधुनिक” काल को विज्ञान, तर्क, लोकतंत्र और समानता के साथ जोड़ा जाता है, लेकिन भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान ये आदर्श पूरी तरह से मौजूद नहीं थे।
