अध्याय 2 – सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु
- सूक्ष्मजीव क्या हैं? (What are Microorganisms?)
- सूक्ष्मजीव बहुत छोटे जीव होते हैं जिन्हें हम अपनी नंगी आँखों से नहीं देख सकते।
- इन्हें देखने के लिए हमें सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आवश्यकता होती है।
ये हर जगह पाए जाते हैं – हवा, पानी, मिट्टी, हमारे शरीर के अंदर और बाहर, और यहाँ तक कि चरम स्थितियों (गर्म झरने, दलदली भूमि) में भी।
- सूक्ष्मजीवों के प्रकार (Types of Microorganisms)
सूक्ष्मजीवों को मुख्य रूप से चार बड़े समूहों में बांटा गया है:
- जीवाणु (Bacteria):
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- ये एककोशिकीय (single-celled) होते हैं।
- इनकी आकृति अलग-अलग हो सकती है – गोल (कोकस), छड़ी जैसी (बैसिलस), सर्पिल (स्पिरिलम)।
- उदाहरण: लैक्टोबैसिलस (दही बनाने वाला), राइजोबियम (नाइट्रोजन स्थिरीकरण)।
- कवक (Fungi):
- ये अक्सर बहुकोशिकीय (multicellular) होते हैं, लेकिन कुछ एककोशिकीय भी होते हैं (जैसे यीस्ट)।
- ये आमतौर पर सड़ी-गली चीजों पर उगते हैं।
- उदाहरण: यीस्ट (अल्कोहल, ब्रेड बनाने में), पेनिसिलियम (एंटीबायोटिक), मशरूम।
iii. प्रोटोजोआ (Protozoa):
- ये ज्यादातर एककोशिकीय होते हैं।
- ये आमतौर पर पानी या नम स्थानों पर पाए जाते हैं।
- उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम, प्लाज्मोडियम (मलेरिया का कारक)।
- शैवाल (Algae):
- ये पादप जैसे होते हैं और प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं।
- ये पानी में पाए जाते हैं।
- उदाहरण: स्पाइरोगाइरा, क्लेमाइडोमोनास।
- विषाणु (Viruses):
- ये अन्य सूक्ष्मजीवों से अलग होते हैं।
- ये केवल मेजबान कोशिका (Host Cell) के अंदर ही प्रजनन करते हैं (जैसे जीवाणु, पौधे या जंतु कोशिका)।
- जब ये बाहर होते हैं तो निर्जीव लगते हैं, लेकिन जीवित कोशिका में प्रवेश करते ही जीवित हो जाते हैं।
- ये कई गंभीर बीमारियाँ फैलाते हैं।
- उदाहरण: जुकाम, फ्लू, पोलियो, खसरा, HIV, कोरोना वायरस।
- मित्रवत सूक्ष्मजीव (Friendly Microorganisms)
सूक्ष्मजीव हमारे लिए कई तरह से उपयोगी होते हैं:
- दही और ब्रेड बनाना (Making Curd and Bread):
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- लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु दूध को दही में बदल देता है।
- यीस्ट (एक कवक) तेजी से प्रजनन करता है और श्वसन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता है, जिससे आटा फूलता है और ब्रेड, पेस्ट्री और केक मुलायम बनते हैं।
- अल्कोहल, शराब और एसिटिक एसिड का उत्पादन (Production of Alcohol, Wine, and Acetic Acid):
- यीस्ट का उपयोग चीनी को अल्कोहल में बदलने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया को किण्वन (Fermentation) कहते हैं।
- लुई पाश्चर ने 1857 में किण्वन की खोज की थी।
iii. औषधीय उपयोग (Medicinal Use):
- एंटीबायोटिक्स (Antibiotics): ये ऐसी दवाएँ हैं जो बीमारी पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकती हैं या उन्हें मार देती हैं।
- पेनिसिलिन पहली एंटीबायोटिक थी, जिसकी खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1929 में की थी (यह पेनिसिलियम नामक कवक से प्राप्त हुई)।
- टीका (Vaccine): बीमारी पैदा करने वाले मृत या कमजोर सूक्ष्मजीवों को शरीर में डाला जाता है। यह शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी (प्रतिरक्षी) बनाने में मदद करता है। एडवर्ड जेनर ने चेचक के टीके की खोज की।
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना (Increasing Soil Fertility):
- कुछ जीवाणु (जैसे राइजोबियम जो फलीदार पौधों की जड़ों में रहते हैं) और नीले-हरे शैवाल वातावरण से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करते हैं और इसे मिट्टी में मिलाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
- पर्यावरण की सफाई (Cleaning the Environment):
- सूक्ष्मजीव मृत पौधों और जानवरों के कार्बनिक कचरे को सरल पदार्थों में अपघटित (decompose) करते हैं, जिससे मिट्टी को पोषक तत्व मिलते हैं और पर्यावरण साफ रहता है।
- हानिकारक सूक्ष्मजीव (Harmful Microorganisms)
कुछ सूक्ष्मजीव हमारे लिए हानिकारक होते हैं और बीमारियाँ फैलाते हैं:
- रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव (Disease-Causing Microorganisms – Pathogens):
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- ऐसे सूक्ष्मजीव जो बीमारियाँ फैलाते हैं, रोगजनक कहलाते हैं।
- ये मनुष्यों, जानवरों और पौधों में रोग उत्पन्न कर सकते हैं।
- संक्रामक रोग (Communicable Diseases): वे रोग जो एक संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में हवा, पानी, भोजन या सीधे संपर्क से फैलते हैं।
- उदाहरण: हैजा, सामान्य जुकाम, चिकन पॉक्स, तपेदिक (Tuberculosis – TB)।
- रोग वाहक (Disease Carriers): कुछ कीट और जानवर ऐसे रोगजनक सूक्ष्मजीवों को ले जाते हैं और उन्हें फैलाते हैं।
- उदाहरण: मादा एनाफिलीज मच्छर (मलेरिया का वाहक), मादा एडीस मच्छर (डेंगू का वाहक), घरेलू मक्खी (हैजा, टाइफाइड)।
- मनुष्यों में सूक्ष्मजीवों से होने वाले सामान्य रोग (Common Human Diseases Caused by Microorganisms): | रोग का नाम | सूक्ष्मजीव का प्रकार | संचरण का तरीका | | :——— | :—————– | :————- | | तपेदिक (TB) | जीवाणु | वायु | | खसरा | विषाणु | वायु | | चिकन पॉक्स | विषाणु | वायु/सीधा संपर्क | | पोलियो | विषाणु | वायु/पानी | | हैजा | जीवाणु | पानी/भोजन | | टाइफाइड | जीवाणु | पानी | | हेपेटाइटिस A | विषाणु | पानी | | मलेरिया | प्रोटोजोआ | मच्छर (वाहक) |iii. पौधों में रोग (Plant Diseases):
- सूक्ष्मजीव पौधों में भी बीमारियाँ फैलाते हैं, जिससे फसल की उपज कम होती है।
- उदाहरण:
- नींबू कैंकर (Citrus Canker): जीवाणु, वायु द्वारा फैलता है।
- गेहूँ की रस्ट (Rust of Wheat): कवक, वायु/बीज द्वारा फैलता है।
- भिंडी की पीत शिरा मोज़ेक (Yellow Vein Mosaic of Okra/Bhindi): विषाणु, कीट द्वारा फैलता है।
- खाद्य विषाक्तता (Food Poisoning):
- कुछ सूक्ष्मजीव हमारे भोजन में विकसित होकर विषाक्त पदार्थ (toxic substances) उत्पन्न करते हैं।
- इन विषाक्त पदार्थों से युक्त भोजन खाने से गंभीर बीमारी या मृत्यु भी हो सकती है।
- यह बासी या खराब भोजन खाने से होता है।
- खाद्य परिरक्षण (Food Preservation)
भोजन को सूक्ष्मजीवों द्वारा खराब होने से बचाने के तरीके:
- रासायनिक विधि (Chemical Method):
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- सोडियम बेंजोएट और सोडियम मेटाबाईसल्फाइट जैसे रसायनों का उपयोग जैम, स्क्वैश और अचार में किया जाता है। ये सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं।
- नमक द्वारा परिरक्षण (Preservation by Common Salt):
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- नमक का उपयोग मांस, मछली, आंवला, आम और इमली को संरक्षित करने के लिए किया जाता है। यह सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकता है।
iii. चीनी द्वारा परिरक्षण (Preservation by Sugar):
- जैम, जेली और स्क्वैश को चीनी की चाशनी में संरक्षित किया जाता है। चीनी नमी को कम करती है, जो सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए आवश्यक है।
- तेल और सिरके द्वारा परिरक्षण (Preservation by Oil and Vinegar):
- अचार में तेल और सिरके का उपयोग सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकता है, क्योंकि वे ऐसे वातावरण में नहीं रह सकते।
- गर्म और ठंडा उपचार (Heat and Cold Treatments):
- गर्म करना: दूध को उबालने से कई सूक्ष्मजीव मर जाते हैं।
- पाश्चुरीकरण (Pasteurization): दूध को 70°C पर 15 से 30 सेकंड के लिए गर्म किया जाता है और फिर तुरंत ठंडा करके भंडारित किया जाता है। यह दूध में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकता है। इस प्रक्रिया की खोज लुई पाश्चर ने की थी।
- ठंडा करना: फ्रिज में रखने से भोजन जल्दी खराब नहीं होता क्योंकि कम तापमान पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि धीमी हो जाती है।
- भंडारण और पैकिंग (Storage and Packing):
- वायु-बंद (airtight) पैकेट में सूखे मेवे और सब्जियाँ बेची जाती हैं ताकि उन्हें सूक्ष्मजीवों से बचाया जा सके।
- नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)
- वायुमंडल में लगभग 78% नाइट्रोजन गैस होती है।
- सभी जीवित जीवों (पौधों और जानवरों) को प्रोटीन, क्लोरोफिल और न्यूक्लिक एसिड के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है।
- पौधे सीधे वायुमंडलीय नाइट्रोजन का उपयोग नहीं कर सकते।
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation):
- कुछ जीवाणु (जैसे राइजोबियम जो दालों की जड़ों में रहते हैं) और नीले-हरे शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोग योग्य नाइट्रोजन यौगिकों में बदलते हैं।
- बिजली चमकने से भी वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है।
नाइट्रोजन चक्र:
- मिट्टी में नाइट्रोजन यौगिकों का पौधों द्वारा अवशोषण।
- पौधों को जानवरों द्वारा खाना।
- मृत पौधों और जानवरों का सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन, जिससे नाइट्रोजन यौगिक वापस मिट्टी में चले जाते हैं।
- कुछ जीवाणु मिट्टी के नाइट्रोजन यौगिकों को नाइट्रोजन गैस में बदल देते हैं, जो वायुमंडल में वापस चली जाती है।
- यह चक्र लगातार चलता रहता है, जिससे वायुमंडल में नाइट्रोजन का संतुलन बना रहता है।
