अध्याय 4 – वायु

अध्याय 4 – वायु

 

  1. वायुमंडल क्या है? (What is the Atmosphere?)
  • हमारी पृथ्वी चारों ओर से वायु की एक विशाल परत से घिरी हुई है, जिसे वायुमंडल (Atmosphere) कहते हैं।
  • यह गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force) के कारण पृथ्वी से जुड़ा हुआ है।
  • वायुमंडल हमें सूर्य की हानिकारक किरणों और अत्यधिक गर्मी से बचाता है।
  • इसमें विभिन्न गैसें, जलवाष्प और धूल के कण होते हैं।

 

  1. वायुमंडल की संरचना (Composition of the Atmosphere)

वायुमंडल कई गैसों का मिश्रण है:

  • नाइट्रोजन (Nitrogen – 78%):
    • वायुमंडल में सबसे प्रचुर मात्रा में गैस।
    • पौधों को जीवित रहने के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, लेकिन वे सीधे हवा से नाइट्रोजन नहीं ले सकते।
    • मिट्टी में रहने वाले कुछ जीवाणु (bacteria) वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के उपयोग के लिए परिवर्तित करते हैं।
  • ऑक्सीजन (Oxygen – 21%):
    • जीवन के लिए दूसरी सबसे प्रचुर मात्रा में गैस।
    • मनुष्य और जानवर श्वसन के लिए ऑक्सीजन लेते हैं।
    • हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के दौरान ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
  • कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide – 0.03%):
    • पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के लिए उपयोग की जाती है।
    • मनुष्य और जानवर श्वसन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
    • यह एक महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस (greenhouse gas) है जो पृथ्वी पर गर्मी बनाए रखती है।
    • इसकी मात्रा में वृद्धि से ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) होती है।
  • अन्य गैसें (Other Gases – लगभग 1%):
    • आर्गन (Argon), नियॉन (Neon), हीलियम (Helium) जैसी गैसें।
  • धूल के कण और जलवाष्प (Dust Particles and Water Vapour): ये भी वायुमंडल में मौजूद होते हैं।

 

  1. वायुमंडल की संरचना (Structure of the Atmosphere)

वायुमंडल को ऊँचाई के आधार पर पाँच परतों में विभाजित किया गया है:

  1. क्षोभमंडल (Troposphere):
    • यह वायुमंडल की सबसे निचली और सबसे महत्वपूर्ण परत है।
    • इसकी औसत ऊँचाई लगभग 13 किमी है।
    • हम जिस हवा में साँस लेते हैं वह यहीं मौजूद है।
    • वर्षा, कोहरा, ओलावृष्टि जैसी सभी मौसमी घटनाएँ इसी परत में होती हैं।

 

  1. समतापमंडल (Stratosphere):
  • क्षोभमंडल के ऊपर स्थित, लगभग 50 किमी की ऊँचाई तक फैली हुई है।
  • यह परत बादलों और मौसम संबंधी घटनाओं से लगभग मुक्त होती है, इसलिए यह हवाई जहाज उड़ाने के लिए आदर्श है।
  • इसमें ओजोन परत (Ozone Layer) होती है, जो हमें सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (ultraviolet) किरणों से बचाती है।

iii. मध्यमंडल (Mesosphere):

  • समतापमंडल के ऊपर स्थित, लगभग 80 किमी की ऊँचाई तक फैली हुई है।
  • अंतरिक्ष से प्रवेश करने वाले उल्कापिंड (meteors) इसी परत में जल जाते हैं।

 

 

  1. बाह्य वायुमंडल/ आयनमंडल (Thermosphere/Ionosphere):
  • मध्यमंडल के ऊपर स्थित, ऊँचाई 80-400 किमी तक।
  • इस परत में तापमान ऊँचाई के साथ तेजी से बढ़ता है।
  • आयनमंडल (Ionosphere): थर्मोस्फीयर का एक हिस्सा है। इसमें आयनित कण होते हैं।
  • यह परत रेडियो संचार (radio transmission) के लिए सहायक है क्योंकि पृथ्वी से प्रेषित रेडियो तरंगें इस परत द्वारा पृथ्वी पर वापस परावर्तित होती हैं।
  1. बहिर्मंडल (Exosphere):
  • यह वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत है।
  • इसमें बहुत पतली हवा होती है, और हीलियम और हाइड्रोजन जैसी हल्की गैसें यहाँ से अंतरिक्ष में तैरती हैं।

 

  1. मौसम और जलवायु (Weather and Climate)
  • मौसम (Weather):
    • यह किसी भी समय वायुमंडल की घंटेदरघंटे या दिनप्रतिदिन की स्थिति को संदर्भित करता है।
    • यह बहुत जल्दी बदल सकता है।
    • उदाहरण: आज धूप है, कल बारिश हो सकती है।
  • जलवायु (Climate):
    • यह एक बड़े क्षेत्र में लंबे समय तक (जैसे 25-30 वर्ष) रहने वाला औसत मौसम है।
    • यह किसी स्थान का स्थायी मौसम पैटर्न होता है।
    • उदाहरण: भारत की जलवायु मानसूनी है।

 

  1. तापमान (Temperature)
  • तापमान हवा में गर्माहट और ठंडक की डिग्री का माप है।
  • सूर्यातप (Insolation): सूर्य से आने वाली ऊर्जा जिसे पृथ्वी द्वारा रोका जाता है।
    • यह भूमध्य रेखा (equator) से ध्रुवों (poles) की ओर घटता जाता है, इसलिए तापमान भी घटता जाता है।
  • वायुदाब (Air Pressure): वायु का भार जो पृथ्वी की सतह पर दबाव डालता है।
    • उच्च वायुदाब (High Pressure): ठंडी और भारी हवा के कारण।
    • निम्न वायुदाब (Low Pressure): गर्म और हल्की हवा के कारण।
    • निम्न वायुदाब क्षेत्रों में बादल और वर्षा होती है।
    • उच्च वायुदाब क्षेत्रों में साफ आसमान होता है।

 

  1. पवनें (Winds)
  • पवन (Wind): उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर हवा की गति को पवन कहते हैं।
  • पवनें तीन प्रकार की होती हैं:
  1. स्थायी पवनें (Permanent Winds): ये पूरे वर्ष लगातार एक ही दिशा में बहती हैं।
      • उदाहरण: व्यापारिक पवनें (Trade Winds), पश्चिमी पवनें (Westerlies), पूर्वी पवनें (Easterlies)।
  1. मौसमी पवनें (Seasonal Winds): ये विभिन्न मौसमों में अपनी दिशा बदलती हैं।
      • उदाहरण: भारत में मानसूनी पवनें।

iii. स्थानीय पवनें (Local Winds): ये केवल दिन या वर्ष के एक छोटे से विशेष अवधि के दौरान एक छोटे से क्षेत्र में बहती हैं।

      • उदाहरण: भारत में लू।

 

  1. नमी (Moisture)
  • जब जल पृथ्वी और विभिन्न जल निकायों से वाष्पीकृत होता है, तो यह जलवाष्प (Water Vapour) बन जाता है।
  • वायु में जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता (Humidity) कहते हैं।
  • जब हवा जलवाष्प से भरी होती है, तो उसे आर्द्र दिन कहते हैं।
  • संघनन (Condensation): जब जलवाष्प ऊपर उठकर ठंडा होता है, तो यह जल की बूंदों में संघनित होकर बादल बनाता है।
  • वर्षा (Precipitation): जब जल की ये बूंदें इतनी भारी हो जाती हैं कि वे तैर नहीं पातीं, तो वे वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरती हैं।
  • वर्षा के प्रकार (Types of Rainfall):
    • संवहनी वर्षा (Convectional Rainfall): गर्म हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है।
    • पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall): जब नमी से भरी हवा पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती है।
    • चक्रवाती वर्षा (Cyclonic Rainfall): जब गर्म और ठंडी हवा की राशियाँ मिलती हैं।

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