अध्याय 3 – दिल्ली: 12वीं से 15वीं शताब्दी

अध्याय 3 – दिल्ली: 12वीं से 15वीं शताब्दी

 

  1. दिल्ली एक राजधानी के रूप में (Delhi as a Capital)
  • दिल्ली 12वीं शताब्दी में एक महत्वपूर्ण शहर के रूप में उभरा।
  • तोमर राजपूतों (Tomar Rajputs) के शासनकाल में दिल्ली पहली बार एक राजधानी बनी।
  • अनंगपाल तोमर (Anangpal Tomar) ने 12वीं शताब्दी के मध्य में दिल्ली की स्थापना की।
  • तोमर को अजमेर के चौहानों (Chauhans) (जिन्हें चहमान भी कहा जाता था) ने हराया।
  • चौहानों के तहत, दिल्ली एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र बन गया। यहाँ बहुत सारे धनी जैन व्यापारी रहते थे और कई मंदिरों का निर्माण करते थे। देहलीवाल (Dehliwal) नामक सिक्के यहाँ ढाले जाते थे।
  • 13वीं शताब्दी की शुरुआत में (1206 .): दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई, जिसने दिल्ली को एक शक्तिशाली साम्राज्य की राजधानी बना दिया।

 

  1. दिल्ली के सुल्तान (The Delhi Sultans)

दिल्ली पर कई राजवंशों ने शासन किया, जिन्हें दिल्ली के सुल्तान कहा जाता है:

  1. आरंभिक तुर्की शासक (Early Turkish Rulers – 1206-1290 .):
    • कुतुबुद्दीन ऐबक (Qutbuddin Aibak)
    • शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (Shamsuddin Iltutmish)
    • रजिया सुल्तान (Raziyya Sultan)
    • गियासुद्दीन बलबन (Ghiyasuddin Balban)
    • रजिया सुल्तान: इल्तुतमिश की बेटी और पहली व एकमात्र महिला शासक। दरबारियों ने एक महिला शासक को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
  1. खिलजी वंश (Khalji Dynasty – 1290-1320 .):
    • जलालुद्दीन खिलजी (Jalaluddin Khalji)
    • अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khalji)
    • अलाउद्दीन खिलजी: सबसे शक्तिशाली खिलजी शासक। उसने दक्षिण भारत तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया।

iii. तुगलक वंश (Tughluq Dynasty – 1320-1414 .):

    • गियासुद्दीन तुगलक (Ghiyasuddin Tughluq)
    • मुहम्मद तुगलक (Muhammad Tughluq)
    • फिरोजशाह तुगलक (Firuz Shah Tughluq)
  1. सैय्यद वंश (Sayyid Dynasty – 1414-1451 .):
    • खिज्र खाँ (Khizr Khan)
  1. लोदी वंश (Lodi Dynasty – 1451-1526 .):
    • बहलोल लोदी (Bahlul Lodi)
    • इब्राहिम लोदी (Ibrahim Lodi)

 

  1. दिल्ली सल्तनत के बारे में जानकारी के स्रोत (Sources of Information about Delhi Sultanate)
  • अभिलेख (Inscriptions): मस्जिदों, मकबरों और इमारतों पर खुदे हुए लेख।
  • सिक्के (Coins): सुल्तानों के बारे में जानकारी और उनकी आर्थिक स्थिति।
  • स्थापत्य कला (Architecture): इमारतें, मस्जिदें, मकबरे उस समय की कला और प्रौद्योगिकी को दर्शाते हैं।
  • तारिख/तवारीख (Tarikh/Tawarikh):
    • ये फारसी भाषा में लिखे गए इतिहास थे, जो दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक भाषा थी।
    • ये सुल्तानों के शासनकाल के दौरान लिखी गई पांडुलिपियाँ थीं।
    • इन्हें अक्सर विद्वान पुरुषों (जैसे सचिव, प्रशासक, कवि और दरबारी) द्वारा लिखा जाता था, जो न्यायसंगत शासन के महत्व पर जोर देते थे।
    • ये इतिहासकार अक्सर सुल्तानों से पुरस्कार की उम्मीद करते थे।

 

  1. गैरिसन शहर से साम्राज्य तक (From Garrison Town to Empire)
  • गैरिसन शहर (Garrison Town): किलेबंद बस्तियाँ जहाँ सैनिक रहते थे।
  • दिल्ली के सुल्तानों ने अपने साम्राज्य का विस्तार इन गैरिसन शहरों से किया।
  • विस्तार (Expansion):
    • भीतरी विस्तार (Internal Expansion): गैरिसन शहरों के भीतरी इलाकों पर नियंत्रण स्थापित करना। इसमें गंगा-यमुना दोआब के जंगलों को साफ करना और किसानों को कृषि भूमि में विस्तार करना शामिल था।
    • बाहरी विस्तार (External Expansion): सैनिक अभियानों द्वारा दूर-दराज के क्षेत्रों को जीतना।
      • अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में और मुहम्मद तुगलक के शासनकाल में दक्षिण भारत तक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए गए।
      • इन अभियानों में, सल्तनत की सेनाओं ने हाथी, घोड़े, दास और मूल्यवान धातुओं पर कब्जा कर लिया।

 

  1. मस्जिदों का निर्माण (Construction of Mosques)
  • सुल्तानों ने पूरे उपमहाद्वीप में कई मस्जिदों का निर्माण किया।
  • ये मस्जिदें मुसलमानों के लिए एक साथ नमाज अदा करने और एक समुदाय के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए जगह प्रदान करती थीं।
  • उदाहरण: कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, बेगमपुरी मस्जिद (मुहम्मद तुगलक द्वारा निर्मित), मोठ की मस्जिद (सिकंदर लोदी के शासनकाल में निर्मित)।

 

  1. सल्तनत की चुनौतियाँ (Challenges of the Sultanate)
  • मंगोल आक्रमण (Mongol Invasions): मंगोलों ने चंगेज खान के नेतृत्व में भारत पर कई बार हमला किया, जिससे सल्तनत को अपनी सेना मजबूत करनी पड़ी।
  • कमजोर प्रांत (Weak Provinces): सल्तनत के पतन के बाद कई स्वतंत्र क्षेत्रीय राज्य उभरे।
  • प्रशासनिक समस्याएँ (Administrative Problems):
    • अलाउद्दीन खिलजी: उसने सैनिकों को वेतन देने के लिए भूमि अनुदान (इक्ता) के बजाय नकद में भुगतान किया। उसने वस्तुओं की कीमतें तय कीं ताकि सैनिक सस्ते में सामान खरीद सकें।
    • मुहम्मद तुगलक: उसने “सांकेतिक मुद्रा” (token currency) शुरू की, जो सफल नहीं रही। उसने राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित किया, जो एक बड़ी विफलता थी।

 

  1. सुल्तानों के तहत प्रशासन और समेकन (Administration and Consolidation under the Sultans)
  • इकता और मुक्ती (Iqta and Muqti):
    • सल्तनत ने इकता (Iqta) नामक बड़े प्रशासनिक क्षेत्रों में भूमि को विभाजित किया।
    • इकता के धारकों को इकतादार (Iqtadar) या मुक्ती (Muqti) कहा जाता था।
    • मुक्ती का कर्तव्य सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना और अपने इकता में कानून और व्यवस्था बनाए रखना था।
    • उन्हें अपनी सैन्य सेवाओं के बदले राजस्व इकट्ठा करने का अधिकार था।
    • राजस्व के लिए राज्य के लेखाकारों द्वारा नियमित रूप से हिसाब-किताब की जाँच की जाती थी।
  • भूमि कर (Land Tax):
    • अलाउद्दीन खिलजी के समय में भू-राजस्व का निर्धारण और संग्रह राज्य के नियंत्रण में लाया गया।
    • किसानों की उपज का लगभग 50% कर के रूप में लिया जाता था।

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