अध्याय 3 – हमारी बदलती पृथ्वी
- स्थलमंडलीय प्लेटें (Lithospheric Plates)
- पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) कई बड़ी और कुछ छोटी, कठोर, अनियमित आकार की प्लेटों में विभाजित है, जिन्हें स्थलमंडलीय प्लेटें (Lithospheric Plates) कहते हैं।
- ये प्लेटें पृथ्वी की सतह पर लगातार धीरे-धीरे घूमती रहती हैं।
- ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी के अंदर पिघले हुए मैग्मा (Magma) में होने वाली गति के कारण। यह पिघला हुआ मैग्मा एक वृत्तीय तरीके से घूमता है।
- बल और पृथ्वी की गतियाँ (Forces and Earth Movements)
पृथ्वी की गतियाँ उन बलों के आधार पर विभाजित होती हैं जो उन्हें उत्पन्न करते हैं:
- अंतर्जनित बल (Endogenic Forces):
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- ये बल पृथ्वी के आंतरिक भाग में उत्पन्न होते हैं।
- आकस्मिक बल (Sudden Forces):
- भूकंप (Earthquakes): जब स्थलमंडलीय प्लेटें हिलती हैं, तो पृथ्वी की सतह पर कंपन होता है। यह कंपन पृथ्वी के चारों ओर यात्रा कर सकता है।
- भूकंप का केंद्र (Focus): वह स्थान जहाँ से कंपन उत्पन्न होता है।
- अधिकेंद्र (Epicentre): भूपर्पटी पर फोकस के ठीक ऊपर का स्थान। अधिकेंद्र के सबसे नजदीक की जगहों पर सबसे ज्यादा नुकसान होता है।
- भूकंपलेखी (Seismograph): भूकंप को मापने वाला उपकरण।
- भूकंप (Earthquakes): जब स्थलमंडलीय प्लेटें हिलती हैं, तो पृथ्वी की सतह पर कंपन होता है। यह कंपन पृथ्वी के चारों ओर यात्रा कर सकता है।
- बहिर्जनित बल (Exogenic Forces):
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- ये बल पृथ्वी की सतह पर कार्य करते हैं।
- अपरदन (Erosion): भूदृश्य का टूटना और घिसना (जैसे जल, वायु, बर्फ द्वारा)।
- निक्षेपण (Deposition): अपरदन के बाद लाए गए पदार्थों का कहीं और जमा होना।
- उदाहरण: नदियाँ, हवा, समुद्री तरंगें, हिमनद।
- प्रमुख भू-आकृतियाँ (Major Landforms)
अपरदन और निक्षेपण की प्रक्रियाएँ पृथ्वी की सतह पर विभिन्न भू-आकृतियाँ बनाती हैं:
- नदी का कार्य (Work of a River):
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- जलप्रपात (Waterfalls): जब नदी कठोर चट्टान से खड़ी ढलान पर गिरती है।
- विसर्प (Meanders): जब नदी मैदान में प्रवेश करती है, तो वह बड़े मोड़ लेती है।
- चापझील (Ox-bow Lakes): विसर्प के लूप कट जाते हैं और एक अलग झील बनाते हैं।
- बाढ़ का मैदान (Floodplain): जब नदी अपने किनारों से ऊपर बहती है, तो यह अपने साथ गाद और अन्य पदार्थ जमा करती है, जिससे उपजाऊ बाढ़ के मैदान बनते हैं।
- लेवी (Levees): नदी के किनारों पर उठाई गई प्राकृतिक तटबंध।
- वितरिकाएँ (Distributaries): जब नदी समुद्र के पास पहुँचती है, तो वह कई छोटी धाराओं में टूट जाती है।
- डेल्टा (Delta): वितरिकाओं के मुहाने पर जमा अवसादों का एक संग्रह।
- समुद्री तरंगों का कार्य (Work of Sea Waves):
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- समुद्री गुफाएँ (Sea Caves): तरंगों द्वारा चट्टानों में बनी गुफाएँ।
- तटीय मेहराब (Sea Arches): जब गुफाएँ इतनी बड़ी हो जाती हैं कि केवल छत ही बची रहती है।
- स्टैक (Stacks): जब मेहराब की छत भी ढह जाती है, तो केवल खड़ी चट्टानें बची रहती हैं।
- समुद्री भृगु (Sea Cliffs): समुद्र के किनारे खड़ी चट्टानी तट।
- पुलिन (Beaches): समुद्री तरंगों द्वारा जमा किए गए रेत के जमाव।
iii. बर्फ का कार्य (Work of Ice – Glaciers):
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- हिमनद (Glaciers): धीमी गति से चलने वाली बर्फ की नदियाँ।
- ये अपने साथ पत्थरों और मलबे को घिसकर ले जाती हैं, जिससे गहरी, यू-आकार की घाटियाँ बनती हैं।
- हिमनद मोरेन (Glacial Moraines): हिमनदों द्वारा लाए गए पदार्थों (जैसे चट्टानें, रेत और गाद) का जमाव।
- हवा का कार्य (Work of Wind):
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- छत्रक शैल (Mushroom Rocks): हवा चट्टानों के निचले हिस्सों को ऊपरी हिस्सों की तुलना में अधिक काटती है, जिससे मशरूम के आकार की चट्टानें बनती हैं।
- रेत के टीले (Sand Dunes): जब हवा रेत को उठाती और जमा करती है, तो कम पहाड़ियों का निर्माण होता है।
- लोएस (Loess): जब रेत के कण बहुत महीन और हल्के होते हैं, तो हवा उन्हें लंबी दूरी तक ले जा सकती है और बड़े क्षेत्रों में जमा कर सकती है। चीन में बड़े लोएस जमाव पाए जाते हैं।
