अध्याय 4 – मुगल (16वीं से 17वीं शताब्दी)
- मुगल कौन थे? (Who were the Mughals?)
- मुगल (Mughals) दो महान शासक वंशों के वंशज थे:
- माता की ओर से: वे चीन और मध्य एशिया के मंगोल शासक चंगेज खान (Genghis Khan – 1227 में मृत्यु) के वंशज थे।
- पिता की ओर से: वे ईरान, इराक और आधुनिक तुर्की के तैमूर (Timur – 1404 में मृत्यु), जो दिल्ली को जीतने वाला शासक था, के वंशज थे।
- मुगलों को मंगोल कहलाना पसंद नहीं था क्योंकि चंगेज खान से जुड़े नरसंहार थे।
- वे खुद को तैमूर के वंशज कहलाना पसंद करते थे क्योंकि उनके पूर्वज तैमूर ने 1398 में दिल्ली पर कब्जा किया था।
- मुगल सैन्य अभियान (Mughal Military Campaigns)
- बाबर (Babur – 1526-1530 ई.):
- 1526 में, बाबर ने पानीपत में इब्राहिम लोदी (दिल्ली सल्तनत के अंतिम लोदी सुल्तान) को हराया और दिल्ली और आगरा पर कब्जा कर लिया, जिससे भारत में मुगल साम्राज्य की नींव पड़ी।
- 1527 में खानवा में राणा सांगा और राजपूत राजाओं को हराया।
- 1528 में चंदेरी में राजपूतों को हराया।
- हुमायूँ (Humayun – 1530-1540 ई. और 1555-1556 ई.):
- बाबर का पुत्र।
- शेरशाह सूरी (Sher Shah Suri) ने उसे चौसा (1539) और कन्नौज (1540) में हराया और उसे ईरान भागने के लिए मजबूर किया।
- 1555 में हुमायूँ ने शेरशाह के उत्तराधिकारियों को हराकर दिल्ली पर फिर से कब्जा कर लिया।
- अकबर (Akbar – 1556-1605 ई.):
- 13 साल की उम्र में राजा बना।
- बैरम खान (Bairam Khan) ने उसके शुरुआती शासनकाल में उसकी मदद की।
- पानीपत की दूसरी लड़ाई (1556): अकबर ने हेमु को हराया।
- उसने एक बड़ा साम्राज्य बनाया और अपनी धार्मिक सहिष्णुता के लिए जाना जाता है।
- जहाँगीर (Jahangir – 1605-1627 ई.):
- अकबर का पुत्र।
- उसकी माँ का नाम जोधा बाई था।
- उसकी पत्नी नूरजहाँ (Nur Jahan) ने उसके शासनकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- शाहजहाँ (Shah Jahan – 1627-1658 ई.):
- जहाँगीर का पुत्र।
- स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है (ताजमहल, लाल किला)।
- औरंगजेब (Aurangzeb – 1658-1707 ई.):
- शाहजहाँ का पुत्र।
- उसने साम्राज्य का सबसे बड़ा विस्तार किया, लेकिन उसके शासनकाल में दक्कन में विद्रोह हुए और सिख, मराठा और जाटों के साथ संघर्ष हुआ।
- उसके बाद मुगल साम्राज्य कमजोर होना शुरू हो गया।
- मुगल परंपराएँ (Mughal Traditions)
- उत्तराधिकार (Succession): मुगलों ने ज्येष्ठाधिकार (primogeniture) के नियम का पालन नहीं किया (जहाँ सबसे बड़ा पुत्र अपने पिता की संपत्ति का उत्तराधिकारी होता है)।
- उन्होंने पैतृक विरासत (coparcenary inheritance) की तैमूरिद परंपरा का पालन किया, जहाँ विरासत को सभी बेटों के बीच विभाजित किया जाता था। इससे अक्सर उत्तराधिकार के लिए संघर्ष होते थे।
- मुगलों के अन्य शासकों से संबंध (Mughal Relations with Other Rulers)
- मुगलों ने कई शासकों को अपनी सेवा में लिया।
- राजपूतों के साथ संबंध (Relations with Rajputs):
- मुगलों ने कई राजपूतों से विवाह संबंध बनाए (जैसे अकबर का विवाह आमेर की राजकुमारी हरखा बाई से)।
- कई राजपूत शासकों ने मुगलों की सेवा स्वीकार की और उच्च पद प्राप्त किए।
- जो प्रतिरोध करते थे, उन्हें हराया जाता था (जैसे मेवाड़ के सिसोदिया राजपूत)।
- मनसबदार और जागीरदार (Mansabdars and Jagirdars)
- मनसबदार (Mansabdars):
- मुगल साम्राज्य में शामिल होने वाले सैन्य और नागरिक अधिकारियों को मनसबदार कहा जाता था।
- ‘मनसब’ का अर्थ एक पद या रैंक था।
- उनकी रैंक जात (Zat) और सवार (Sawar) नामक संख्या द्वारा निर्धारित की जाती थी।
- जात: यह मनसबदार के पद और वेतन को दर्शाता था। जात की संख्या जितनी अधिक होती थी, दरबार में उसकी स्थिति उतनी ही प्रतिष्ठित होती थी और उसका वेतन भी उतना ही अधिक होता था।
- सवार: यह घुड़सवारों की संख्या को दर्शाता था जिसे मनसबदार को बनाए रखना पड़ता था।
- मनसबदारों को वेतन के रूप में जागीर (Jagirs) मिलती थी, जो इकता के समान थी (हालांकि इकतादार के विपरीत, मनसबदार अपनी जागीरों में नहीं रहते थे और न ही उन पर शासन करते थे)।
- मनसबदार केवल अपनी जागीरों से राजस्व एकत्र करते थे, जिसे उनके नौकरों द्वारा एकत्र किया जाता था।
- जब्त और जमींदार (Zabt and Zamindars):
- जमींदार (Zamindars): ग्रामीण इलाकों में, स्थानीय मुखिया या शक्तिशाली सरदार कभी-कभी सभी किसानों से राजस्व इकट्ठा करते थे और उसे मुगलों को देते थे। ऐसे बिचौलियों को जमींदार कहा जाता था।
- जब्त (Zabt): अकबर के राजस्व मंत्री टोडरमल (Todar Mal) ने 10 साल की अवधि के लिए फसल की पैदावार, कीमतों और कृषि क्षेत्रों पर डेटा का एक सर्वेक्षण किया। इस डेटा के आधार पर, प्रत्येक फसल के लिए नकद में कर तय किया गया। इस राजस्व प्रणाली को जब्त कहा जाता था।
- यह उन क्षेत्रों में संभव था जहाँ मुगल प्रशासन का प्रत्यक्ष नियंत्रण था और राजस्व अधिकारी भूमि का सर्वेक्षण कर सकते थे।
- अबुल फजल की ‘अकबरनामा’ और ‘आईन-ए-अकबरी’ (Abul Fazl’s ‘Akbarnama’ and ‘Ain-i Akbari’)
- अबुल फजल (Abul Fazl): अकबर के दरबारी कवि और मित्र।
- उसने अकबर के शासनकाल का इतिहास ‘अकबरनामा‘ नामक तीन खंडों में लिखा:
- पहला खंड: अकबर के पूर्वजों का इतिहास।
- दूसरा खंड: अकबर के शासनकाल की घटनाएँ।
- तीसरा खंड: ‘आईन–ए–अकबरी‘ (Ain-i Akbari):
- यह अकबर के प्रशासन, सेना, राजस्व, भौगोलिक स्थिति और भारतीय संस्कृति के बारे में विस्तृत जानकारी देता है।
- इसमें फसलों, पैदावारों, कीमतों, करों और मजदूरों के सांख्यिकीय विवरण भी शामिल हैं।
- अकबर की धार्मिक नीति: सुलह-ए-कुल (Akbar’s Religious Policy: Sulh-i Kul)
- अकबर ने धार्मिक बहसें आयोजित कीं, विशेषकर फतेहपुर सीकरी में इबादतखाना (Ibadat Khana) में ब्राह्मणों, जेसुइट पादरियों (Jesuit priests) और जोरोस्ट्रियन (Zoroastrians) के साथ।
- इन चर्चाओं ने उसे एहसास दिलाया कि धार्मिक कट्टरता समाज में विभाजन पैदा करती है।
- उसने सुलह–ए–कुल (Sulh-i Kul) की नीति विकसित की, जिसका अर्थ “सार्वभौमिक शांति“ था।
- यह नीति सहिष्णुता (Tolerance) पर आधारित थी और इसमें धार्मिक पूर्वाग्रहों के बिना सभी धर्मों के प्रति सम्मान शामिल था।
- इस नीति ने प्रशासन में न्याय और शांति सुनिश्चित की।
- जहाँगीर और शाहजहाँ ने भी इस नीति का पालन किया।
- मुगल साम्राज्य 17वीं शताब्दी में और उसके बाद (The Mughal Empire in the 17th Century and After)
- 17वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य अपनी शक्ति और धन के चरम पर पहुँच गया।
- हालांकि, 18वीं शताब्दी में औरंगजेब की मृत्यु के बाद, साम्राज्य कमजोर होना शुरू हो गया।
- कारण:
- औरंगजेब की नीतियाँ: उसके सैन्य अभियानों से वित्तीय संसाधन समाप्त हो गए और दक्कन में उसके लंबे युद्धों ने साम्राज्य को कमजोर कर दिया।
- जागीरदारी संकट (Jagirdari Crisis): मनसबदारों की संख्या बढ़ गई, जिससे जागीरों की कमी हो गई और राजस्व संग्रह में समस्याएँ आईं।
- उत्तराधिकार के संघर्ष: राजकुमारों के बीच लगातार संघर्ष।
- क्षेत्रीय शक्तियों का उदय: क्षेत्रीय समूह (जैसे मराठा, सिख और अन्य राजपूत राज्य) अपनी शक्ति बढ़ा रहे थे।
- ये कारक अंततः मुगल साम्राज्य के पतन का कारण बने, और कई स्वतंत्र क्षेत्रीय राज्य उभरे।
